स्वयं की शक्ति को पहचानें। know your strengths in hindi

आपकी ताकत दुनिया के लिए आपका मूल्य है

ताकत क्या है ?

ताकत उन चीजों को दर्शाती है जो आपके लिए आसान हैं।

कमजोरी क्या है ?

कमजोरी वे चीजें हैं जो आपके लिए आसान नहीं हैं।

आपको अपनी ताकत और कमजोरी का प्रबंधन क्यों करना चाहिए ?

आप अपनी ताकत और कमजोरियों का प्रबंधन कैसे करते हैं, यह दुनिया में पनपने की आपकी क्षमता को निर्धारित करता है।

इस संसार में जन्म लेने वाला व्यक्ति किसी न किसी ईश्वर प्रदत विशिष्ट क्षमता का समय होता है । यदि उसे अपनी योग्यता के अनुसार सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है तथा उत्सव प्रतियोगिता को विकसित करने का अवसर प्राप्त हो जाता है तो वह निश्चय ही सफलता प्राप्त कर लेता है । know your strengths in hindi

अपनी अंत: क्षमता को विकसित करने के लिए मनुष्य को इच्छा शक्ति तथा निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है । अभ्यास के द्वारा मनुष्य बड़े से बड़ा कार्य निपुणता पूर्वक कर सकता है । इसमें कोई संदेह नहीं है

‘’प्रेक्टिस मेकस ए मन परफेक्ट’’

जिस प्रकार प्रत्येक मनुष्य मानव शिशु में चलने, बोलने तथा समझने की शक्ति विद्यमान होती है किंतु समय के साथ साथ निरंतर अभ्यास के द्वारा क्षमताओं का विकास किया जाता है, उसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य कोई न कोई विशिष्ट कार्य करने की क्षमता को लेकर संसार में आता है या यूं कहिए कि प्रत्येक व्यक्ति हर वह कार्य कर सकता है जिसे करने के लिए वह दृढ़ निश्चय कर लेता है तथा निरंतर प्रयासरत रहता है ।

प्रसिद्ध गणितज्ञ रामानुजन बचपन में ही मंद बुद्धि वाले छात्र के रूप में जाने जाते थे । गुरु जी ने जो कुछ भी बताते भी भूल जाते थे । इसी कारण उन्हें रोज गुरुजी की मार खानी पड़ती थी । रोज रोज की मार से तंग आकर एक दिन रामानुजन चुपचाप विद्यालय छोड़कर भाग गए । know your strengths in hindi

अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है

रास्ते में एक कुवे पर पानी पीने के लिए रुके । कुएं की मुंडेर पर बैठकर विश्राम करने लगे । मुंडेर पर रखे हुए पत्थरों में रस्सी की रगड़ से बने हुए गहरे घाव को देखकर उनकी चेतना शक्ति जागृत हो उठी । उन्होंने सोचा कि जब मुलायम रस्सी कि निरंतर रगड़ से कठोर पत्थर कट सकता है ,तो मनुष्य की बुद्धि निरंतर अभ्यास के द्वारा क्यों तीव्र नहीं हो सकती ।

वह वापस विद्यालय लौट आए और अपनी गलती के लिए गुरुजी से क्षमा मांगी । उस दिन के बाद रामानुजन निरंतर अभ्यास के साथ गुरु जी के द्वारा दिए गए पाठकों को याद करने लगे । यही रामानुजन आगे चलकर विश्वविख्यात गणितज्ञ बने । know your strengths in hindi

रामानुजन के अंदर ज्ञान का भंडार तो पहले से ही विद्यमान था किंतु उन्हें एक प्रेरणा की आवश्यकता थी जो उन्हें कुएं की मुंडेर पर बैठकर प्राप्त हुई । सही ही कहा है ‘’करत करत अभ्यास के, जडमति होत सुजान । रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निशान ।

अपनी ताकत पर ध्यान दें

जब तक आप अपनी अभी रुचि के अनुसार अंत शक्ति को जागृत करके निरंतर अभ्यास के द्वारा उसे विकसित नहीं करेंगे, तब तक आपका जीवन सार्थक नहीं हो सकता है । खाना-पीना, सांस लेना, चलना फिरना आदि जैविक क्रियाओं का संचालन मात्र ही जीवन का स्वरूप नहीं है ।

यह तो मानव शरीर की यांत्रिक क्रियाएं हैं जिनसे शरीर की सक्रियता का ज्ञान होता है । जीवन का वास्तविक स्वरूप तो तब दिखाई पड़ता है जब हम अपने शरीर की अंता शक्तियों का उपयोग करके किसी विशिष्ट कार्य का संपादन करते हैं ।

जो लोग स्वयं को पहचान लेते हैं वे अपने जीवन के द्वारा संपूर्ण मनुष्य जाति के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं । कभी-कभी हमारे चारों तरफ का वातावरण ऐसा बन जाता है कि हम विवश होकर उसी के अनुकूल आचरण करने लगते हैं ।

यदि हमें अपनी शक्तियों को थोड़ा सा भी एहसास हो जाए तो हमें वास्तविकता का ज्ञान हो जाता है तथा हमारा संपूर्ण जीवन ही परिवर्तित हो जाता है । एक पुरानी किंतु सत्य घटना, इसकी सत्यता को स्पष्ट करती है

संगत का प्रभाव

काफी पहले की बात है एक समाचार पत्र में इस घटना का प्रकाशन हुआ था । घटना कुछ इस प्रकार थी । जंगल में शिकारियों ने एक भेड़िया मानव को पकड़ा । दरअसल भेड़िए के एक झुंड में इस विचित्र से भेड़िए को देखकर शिकारियों को बड़ी उत्सुकता हुई ।

इस भेड़िये के शरीर की बनावट मानव जैसे थी,किंतु हाव-भाव, चलने का ढंग, यहां तक कि आवाज कि गुर्राहट भी भेड़िए के समान ही थी । वास्तविकता यह थी की एक बच्चे को भेड़िया उठा ले गया, किंतु उसे मारा नहीं । भाग्य बस उस बच्चे का जीवन तो बच गया किंतु भेडियों के साथ रहने के कारण उसकी सारी आदतें भेड़िये जैसी ही हो गई थी ।

तरुणाई तक आते-आते वह पूर्ण रुप से भेंड़िया बन गया । अतः वातावरण का, संगत का मनुष्य के स्वभाव पर बहुत प्रभाव पड़ता है । इसी प्रसंग में एक लोक कथा बहुत प्रचलित है । एक बार एक शेर का बच्चा अपने माता-पिता से बिछड़कर भेड़ों के झुंड में शामिल हो गया । know your capacity in hindi

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भूखा होने के कारण वह एक भेड़ का दूध पीने लगा और उसी के साथ रहने लगा । इसका परिणाम यह हुआ कि वह शेर का बच्चा भी भेंड के समान सीधा साधा और डरपोक बन गया । वह भूल गया कि वह एक शेर का बच्चा है ।

अपनी कमजोरियों को सुधारें

एक दिन जंगल में शेर की दहाड़ सुनकर वह रोमांचित हो उठा । उसे लगा कि यह तो उसकी अपनी आवाज है । थोड़ा सा प्रयास करने के बाद, वह भी उसी प्रकार से दहाड़ उठा । भेड़ो का झुंड भयभीत होकर वहा से भाग गया ।

सामर्थ्यवान होते हुए भी हम कई बार परिस्थितियों बस अपनी शक्ति से अंजान बने रहते हैं । उचित अवसर मिलने पर यदि हम अपनी शक्तियों को पहचान कर उनका सही उपयोग करें तो निश्चय ही हमारे जीवन का उद्देश्य पूरा हो सकता है ।

ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को शक्ति संपन्न बनाया है । जो व्यक्ति अपनी शक्ति को पहचान लेता है तथा पूर्ण विश्वास के साथ सही दिशा में उसका उपयोग करता है वह निरंतर सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ता जाता है । तथा जो इन शक्तियों के रहता है या जानते हुए भी आलस्य प्रमाद बस उनका उपयोग नहीं करता है वह दिन ही नहीं बना रहता है ।

अपना मूल्य जानो

एक बार एक व्यक्ति भिक्षा मांग रहा था । शरीर से तो स्वस्थ ही दिखाई दे रहा था । स्वामी विवेकानंद ने उसे अपने पास बुलाया और पूछा भाई तुम भी क्यों मांग रहे हो? क्या करूं स्वामी जी बहुत गरीब हूं, 2 दिन से भूखा हूं, घर में कुछ खाने के लिए नहीं है । मजबूर होकर भीख मांग रहा हूं ।उस व्यक्ति ने दयनीय स्वर में कहा

स्वामी जी ने मुस्कुराते हुए कहा, तुम्हारे पास तो लाखों की संपत्ति है फिर भी तुम अपने आप को गरीब कहते हो । क्यों मजाक करते हो स्वामी जी यदि मेरे पास लाखों की संपत्ति होती तो क्या मैं भीख मांगता है? उस व्यक्ति ने गिडगिडाते हुए कहा

संपत्ति तो तुम्हारे पास है किंतु या तो तुम्हें उसका ज्ञान नहीं है, या फिर तुम जानबूझकर उसका उपयोग नहीं करना चाहते हो । अच्छा बोलो, तुम अपने हाथ मुझे कितने में बेचोगे ? मैं तुम्हें इनके ₹100000 दूंगा । ठीक है पैरों की भी ₹100000 दे दूंगा । स्वामी जी उसके शरीर के अंगों की कीमत लगाते जा रहे थे और वह व्यक्ति चुपचाप शर्म से सिर झुकाए खड़ा था ।

अपनी कमजोरियों का प्रबंधन करना

उसकी आंखें भर आई । वह स्वामी जी के पैरों में गिर पड़ा । स्वामी जी ने उसे उठाते हुए कहा, तुमने बड़ी आसानी से कह दिया कि मैं बहुत गरीब हूं, जबकि तुम्हारे पास हर वह वस्तु है जो एक व्यक्ति के पास होनी चाहिए ।

ईश्वर ने तुम्हें यह दौलत उपयोग करने के लिए दी है, ताकि तुम स्वाभिमान के साथ जीवन बिता सको ना की भीख मांगकर आत्म सम्मान गिराने के लिए । जाओ और परिश्रम करके जीविकोपार्जन करो । वापस जाते समय उस व्यक्ति की आंखों में दीनता नहीं, आत्म सम्मान की चमक थी । know your strengths in hindi

 शारीरिक क्षमता के साथ साथ ईश्वर ने हमें बौद्धिक शक्ति भी प्रदान की है जिसके द्वारा हम अपने अच्छे ,बुरे, नैतिक, अनैतिक आदि गुणों को पहचानकर मानवोचित आचरण के द्वारा निरंतर विकास की ओर अग्रसर बने रह सकते हैं ।

जैसे जैसे आप अपनी बौद्धिक शक्ति का उपयोग करते जाएंगे, वैसे-वैसे इसमें और वृद्धि होती जाएगी । बौद्धिक शक्ति मनुष्य की ऐसी शक्ति है जिसका उपयोग करने से इसमें वृद्धि होती है तथा संचय करने से या नष्ट हो जाती है । कहा भी है

‘’अपूर्व कोअपी कोशोयं विद थे तब भारती । व्ययतो वृद्धिमायाति क्षय्मायती संच्यात’’

दृढ निश्चयी एवं लगनशील बने

महाभारत के एक कथानक में जब द्रोणाचार्य ने एकलव्य को अपना शिष्य बनाने से मना कर दिया तब एकलव्य को बहुत दुख हुआ ।किन्तु उसे अपनी क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास था । दृढ निश्चय एकलव्य ,द्रोणाचार्य को अपना गुरु मान चुका था । know your strengths in hindi

अत: जंगल में उसने गुरु द्रोणाचार्य की एक प्रतिमा बनाई तथा नित्य प्रति उस प्रतिमा को गुरुवत प्रणाम करके स्वत: ही धनुर्विद्या का अभ्यास करने लगा । निरंतर अभ्यास एवं दृढ़ निश्चय के द्वारा क्लब ने धनुविद्या के क्षेत्र में जो निपुणता प्राप्त कर ली थी वह अर्जुन से भी कहीं अधिक थी ।

धन्य हो गुरु द्रोणाचार्य का शिष्य प्रेम, जिसके कारण उन्होंने गुरु दक्षिणा में उसके दाएं हाथ का अंगूठा ही मांग लिया ताकि वह अर्जुन का प्रतिद्वंदी ना बन जाए ।

अपने लक्ष्य के लिए खुद को समर्पित करें

इस प्रकार की शक्तियों पर किसी व्यक्ति विशेष का एकाधिकार नहीं है । कोई भी व्यक्ति अपनी शक्तियों को कर सकता है आवश्यकता है आपके दृढ़ निश्चय एवं निरंतर अभ्यास की जोकि एकलव्य मे थी । बौद्धिक शक्ति प्रदान करके ईश्वर ने मनुष्य को प्रकृति का सबसे शक्तिशाली प्राणी बना दिया है ।

इसी बौद्धिक शक्ति के द्वारा मनुष्य ने जल, थल एवं आकाश और अपना अधिपत्य स्थापित कर रखा है । यह सब देखते हुए भी यदि कोई व्यक्ति अपनी शक्ति को कम करके देखता है तो उसे अकर्मण्य की संज्ञा दी जा सकती है । ऐसे अकर्मण्य व्यक्ति के लिए तुलसीदास जी ने सच ही कहा है

‘’सकल पदारथ है जग माही । कर्म हीन नर पावत नाही’’

अपने मन में विश्वास जगह के आपका यह सभी मातृ शक्तियों से पूर्ण बनाकर इस संसार में भेजा है तथा इस पत्र में अपना ही इसके संचालन के लिए भेजा है । जिस पर आप इस तथ्य को अपने अंतः करण से स्वीकार कर लेंगे उसी पल से आपका जीवन उत्तरोत्तर उन्नति की ओर बढ़ता जाएगा ।

‘’मैन इज द बेस्ट क्रिएशन ऑफ गॉड एंड यू आर अ पार्ट ऑफ इट’’

अपने भीतर की शक्ति कैसे पहचाने ?

हमारा संपूर्ण इतिहास धार्मिक ग्रंथों से भरे पड़े हैं जिन से ज्ञात होता है कि जिसने भी अपने अंदर की शक्तियों में से कुछ या किसी एक को भी अपने अंतःकरण में जागृत कर लिया उसने मानवी सफलता की चरम सीमा को प्राप्त कर लिया ।

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मनुष्य अपने भविष्य का निर्माण अपने कर्मों के द्वारा करता है । यदि आप चाहते हैं कि आपका भविष्य एवं जीवन सफल हो तो चैन को पहचानिए तथा अपनी सामर्थ्य को विकसित कीजिए ताकि आने वाला समय न केवल आपके लिए बल्कि संपूर्ण मानव समुदाय के लिए एक आदर्श बन जाए । know your capability

‘’द पास्ट बेलोंग्स टू अस बट वि डू नॉट बिलॉन्ग टू द पास्ट.वी बिलॉन्ग टू द प्रेजेंट. वी आर मेकर ऑफ द फ्यूचर’’

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