Short Stories in Hindi जो आपकी जिंदगी बदल देंगी

Short Stories in Hindi :- दोस्तों अगर आप गूगल में motivational story सर्च करके यहा तक पहुचे है तो आप बिल्कुल सही जगह आये है । आज के इस पोस्ट में मै आपको इसी के बारे में बताऊंगा । तो आप लास्ट तक जरुर पढ़े ।

Motivational कहानियो का बहुत बड़ा हाथ होता की सफलता के पीछे।

उनके बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि उनसे सीखना बहुत आसान है, और कहानी के अंत में हमेशा एक सीख़ होती है।

चाहे वे सच्ची कहानियाँ हों या प्रेणादायक कहानी, इंसान को सफलता का मजा चखाती है ।

हालाँकि, जिन कहानियों के बारे में मैं बात कर रहा हूँ, वे इतनी Motivational ,शक्तिशाली और प्रेरणादायक हैं कि उनमें से कई वास्तव में आपको सोचने पर मजबूर कर देती हैं और यहाँ तक कि कभी-कभी आपको अवाक कर देती हैं।

3 Short Stories in Hindi

मैं पिछले कुछ हफ़्तों में इनमें से बहुत सी लघु कथाएँ पढ़ रहा हूँ और उनके पीछे के पाठों को वास्तव में अद्भुत पाया। इसलिए मैंने इस लेख को लिखने का फैसला किया है, जो मैंने 10 सबसे प्रेरणादायक लघु कथाओं को सुना है।

उपशीर्षकों के आगे, कोष्ठकों में, मैंने प्रत्येक Part के अंत में कहानी की नैतिकता के संक्षिप्त विवरण के साथ कहानी का पाठ क्या है, रखा है।

1. रतन टाटा ने लिया फोर्ड से बदला (आत्मविश्वाश )

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Short Stories in Hindi

साल था 1999 ,

रतन टाटा एवं उनकी टीम अपने कार व्यवसाय को फोर्ड कंपनी को बेचने न्यूयॉर्क शहर गए उस समय फोर्ड कंपनी अपने ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर के लिए जानी जाती थी

रतन टाटा ने अपने जीवनकाल में टाटा ग्रुप की कमान सभालने के बाद बहुत सारे ऐसे निर्णय लिए जिनके लिए वे बिलकुल भी राजी नहीं थे कुछ निर्णय सफल साबित हुए और कुछ निर्णय सफल बनाने के लिए उन्होंने समय लिया

टाटा कंपनी की फोर्ड कंपनी के दिग्गज अधिकारियो के साथ हो रही मीटिंग के दौरान फोर्ड कंपनी के एक दिग्गज अधिकारी ने रतन टाटा को बेइज्जत करते हुए बहुत खरी खोटी सुनाई जो रतन टाटा के दिल में चुभ गयी

उस समय फोर्ड कंपनी के अधिकारी ने कहा ;

” आप Motor car business के बारे में कुछ नहीं जानते, आपने Motor car डिवीजन शुरू ही क्यों शुरू किया’। उन्होंने कहा कि वे हमारी कार डिवीजन खरीदकर हम पर एहसान करेंगे। ”

टाटा मोटर्स की टीम ने उसी दिन न्यूयॉर्क से वापस लौटने का निर्णय किया और 90 मिनट की उड़ान के दौरान टाटा कंपनी के अध्यक्ष रतन टाटा बहुत उदास थे.

“यह बात थी 1999 की और साल 2008 चल रहा था , वही फोर्ड का जेएलआर टाटा कंपनी के द्वारा खरीदा गया। फोर्ड के चेयरमैन बिल फोर्ड ने टाटा को धन्यवाद दिया, और कहा

‘आप जेएलआर खरीदकर हम पर एक बड़ा एहसान कर रहे हैं’”

साल 1998 में टाटा कंपनी की कार इंडिका की बेहद ही खराब परदर्शन के कारण टाटा मोटर्स को 1998 में अपनी शुरुआत के एक साल के भीतर ही फोर्ड मोटर को कार कारोबार बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा था ।

उन दिनों टाटा कंपनी के कुछ खाश लोगों ने चेयरमैन रतन टाटा को कार डिवीजन को लॉन्च के बाद मिली खराब प्रतिक्रिया के बाद बेचने की सलाह दी। फोर्ड के अधिकारी टाटा मोटर के मुख्यालय मुंबई हाउस आए और कार व्यवसाय में रुचि दिखाई।

“टाटा कंपनी की टीम को मीटिंग के लिए डेट्रॉइट शहर बुलाया गया और लगभग तीन घंटे तक, टाटा कंपनी की टीम ने फोर्ड के अधिकारियों के साथ टाटा मोटर की कार डेविसन को बेचने के ऊपर चर्चा की, लेकिन फोर्ड कंपनियों के अधिकारियो के द्वारा अपमानजनक व्यवहार किया गया,”

‘अपमान’ के नौ साल बाद, समय एक बार फिर बदल गया और नमक के कारोबार से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाली रतन टाटा की अगुवाई वाली टाटा कंपनी ने दुनिया की जानी मानी कंपनी फोर्ड कंपनी को नीचा दिखाया – जो 2008 के वैश्विक वित्तीय मंदी के बाद दिवालिया होने के कगार पर था – जगुआर एवं लैंड रोवर ब्रांड को 2.3 बिलियन डॉलर में खरीदकर ।

कहानी का नैतिक:

दुनिया आपको कितना भी कोशे आपको पीछे करने की कोशिश करे, हमेशा इस विश्वास के साथ बने रहें कि आप जो हासिल करना चाहते हैं वह मुमकिन है। खुद पर विश्वास करना कि आप सफल हो सकते हैं.

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2. स्पेस-एक्स पर दांव खेलकर सफल बने (Elon Musk के सफल होने की ज़िद )

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अगर किसी जवान लड़का जिसकी उम्र 25 हो और उसको 200 मिलियन डॉलर मिल जाये तो वो क्या करेगा तो वह इसे ज्यादातर अपने ऐशो आराम पर खर्च करेगा,

लेकिन एलोन मॉस्क ने इसका उल्टा किया इतनी कम उम्र में उन्होंने कुछ बड़ा करने का सोचा और

एलोन मस्क ने टेस्ला मोटर्स पर $ 80 मिलियन का निवेश किया और इसके सीईओ बन गए।

स्पेसएक्स के मामले में भी, शुरुआत में यह एक असफलता थी,

”उन्होंने अपना पहला रॉकेट लॉन्च करने की कोशिश की वे असफल रहे उसके बाद दूसरा और लगातार तीसरा राकेट लेकिन हर बार उनके राकेट आसमान तक पहुंचने में असफल रहे, हर असफलता के लिए एलोन मॉस्क को जो घाटा हो रहा था उसकी कीमत लाखों डॉलर में थी.अगर एक और रॉकेट लॉन्च असफल हो जाता , तो एलोन मस्क उस समय अपना सारा पैसा खो सकते थे”

 लेकिन उनके चौथे प्रयास में यह परियोजना सफल हो गई, उनका राकेट आसमान की उचइयो छू गया

उनके चौथा राकेट के परीक्षण में सफल हो जाने के बाद उन्हें नासा से एक सौदा मिला जिसके लिए उन्हें बिलियन डॉलर की फण्डिंग मिली

और तब से लेकर अभी तक उनकी कंपनी स्पेस-एक्स दुनिया में अपने झंडे गाड़ रही है। स्पेस-एक्स अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अंतरिक्ष यान भेजने वाली पहली निजी कंपनी हैं। एलोन मॉस्क ने खुद बिना किसी की मदद के सिर्फ किताबो से Rocket Science समझा , क्योंकि उन्होंने 12 साल की उम्र में खुद को Programming सिखाई थी, उनके लिए ये सिर्फ एक Rocket Science है.

वह कभी हार नहीं मानते ।

 एक बार एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा,

मेरी मानसिकता एक समुराई की है। मैं असफल होने के बजाय सेपुकू करना पसंद करूंगा। ”जापानी समुराई अपने दुश्मनों को उन्हें मारने नहीं देंगे यदि वे एक लड़ाई नहीं जीत सकते हैं तो वे अपने ब्लेड से खुद को मार लेंगे। 

इस “कभी हार न मानने वाली ज़िद ” ने उन्हें अपार सफलता दिलाई। इतना ही नहीं बल्कि वह मेहनती भी हैं, वह सप्ताह में 80-100 घंटे काम करते हैं। यह 46 वर्षीय बिजनेस मैग्नेट रॉबर्ट डाउनी जूनियर द्वारा निभाए गए फिल्म चरित्र “आयरन मैन” के लिए आंशिक प्रेरणा है।

क्या आप जानते है की एलोन मॉस्क बोलते समय हकलाते है, लेकिन भीड़ आमतौर पर एक असफल इंसान पर हंसती है और सफल इंसान का स्वागत करती है और उनकी गलतियों को और उनकी कमियों को नजरअंदाज कर देती है

बस अगर आप सफल इंसान है

कहानी का नैतिक:

दुनिया आपकी कमियों के ऊपर कितना भी हसे आपको कितना भी तंग करे अगर आपने ये ठान लिया सफल होकर रहेंगे और आप कभी हार नहीं मानेंगे तो आप बहुत ऊपर तक जायेंगे और लोग आपकी इज्जत करेंगे।

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3.जैक मा (Jack Ma) (कभी हार न मानने वाला जूनून)

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  जैक मा दिग्गजों की लीग में से एक है। जैक मा हार्वर्ड या स्टैनफोर्ड से ड्रॉपआउट नहीं हैं। वह बिल्कुल आपके और मेरे जैसे हैं, जो कभी-कभार फेल हो जाते हैं,

उन्हें परीक्षा पास करने में कठिनाई होती है और कई नौकरियों से खारिज कर दिया जाता है जिसमें वेटर की नौकरी भी शामिल है। अरबों डॉलर की कंपनी की सफलतापूर्वक स्थापना करने से पहले सभी उसके जीवन का हिस्सा थे। 

जैक मा का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था और एक किशोर के रूप में, वह अंग्रेजी पाठ के बदले शहर भर के आगंतुकों के लिए पर्यटन की पेशकश करने के लिए जल्दी उठ जाते थे। उनके पास एक अमीर और समृध्द परिवार नहीं था. और न ही किसी बड़े इंसान से संबंध थे, इसलिए शिक्षा के माध्यम से ही वह सफल हो सकते थे।

 उन्होंने हाई स्कूल के बाद कॉलेज में आवेदन किया लेकिन तीसरे प्रयास में सफल होने से पहले एक बार नहीं बल्कि दो बार प्रवेश परीक्षा में असफल रहे। 

स्नातक होने के बाद, उन्होंने जितने काम कर सकते थे उतने काम करने की कोशिश की, केवल सभी से अस्वीकृति का सामना करना पड़ा।

 अंत में, उन्हें एक अंग्रेजी शिक्षक के रूप में $12 डॉलर हर महीने के एक छोटे वेतन के साथ काम पर रखा गया था यह बहुत ही काम वेतन था  लेकिन उन्होंने अपनी नौकरी का आनंद लिया और प्यार किया।

 1995 में अमेरिका की यात्रा के दौरान जब जैक मा को इंटरनेट से परिचित कराया गया तो वे रोमांचित हो गए। यह यात्रा एक उनकी सफलता का एक हिस्सा बन गयी थी और उन्होंने इसके ऊपर काम करना शुरू कर दिया था ।

 इंटरनेट पर उन्होंने जो पहला शब्द खोजा, वह “बीयर” था, लेकिन उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि खोज परिणामों में कोई भी चीनी बियर नहीं आया। आश्चर्य की बात यह थी कि उन्हें पता था कि चीन में कई अच्छे बियर हैं और इससे भी अधिक, उन्हें खोज परिणामों पर चीन का कोई उत्पाद नहीं मिला। 

वह चीन लौट आया और एक कंपनी “चाइना पेज” की स्थापना की जिसने कंपनियों को अपने व्यवसाय के लिए वेबसाइट बनाने में मदद की। लेकिन वह उपक्रम असफल रहा।

 कुछ वर्षों के बाद, उन्होंने अपने अपार्टमेंट में 17 दोस्तों को इकट्ठा किया और अलीबाबा के अपने भविस्य के व्यापार को उनके सामने रखा । वह एक दुनिया के ऑनलाइन बाज़ार का निर्माण करना चाहता था जहाँ व्यवसायी लोग चीजों को ऑनलाइन लिस्ट कर सकें और ग्राहक उन्हें खरीद सकें। 

उस दिन के बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अलीबाबा ने ग्लोबल मार्केटप्लेस पर अपना कब्जा जमाना शुरू कर दिया। 

”1999 अक्टूबर तक, अलीबाबा ने गोल्डमैन सैक्स से $ 5 मिलियन और सॉफ्टबैंक से $ 20 मिलियन जुटाए थे। 2005 में, Yahoo ने कंपनी में 40% हिस्सेदारी के बदले में $1 बिलियन का भारी निवेश किया। यह अलीबाबा के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि ईबे चीनी बाजार पर कब्जा कर रहा था। अलीबाबा की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) अभी भी न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के इतिहास में सबसे बड़ा आईपीओ है”

कहानी का नैतिक:

जैक मा की कहानी हमें सिखाती है कि एक सामान्य व्यक्ति सभी सीमाओं से ऊपर उठ सकता है अगर उसके अंदर हार ना मानने का जूनून है.

समापन

दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको ये Short Stories in Hindi पढ़ के अच्छा लगा होगा । अगर आप और भी इस तरह कि motivational story in hindi पढना चाहते है तो हमे कमेंट करके जरुर बताये । हम आपके लिए और भी अच्छी motivational kahani in hindi में लेकर आयेगे । और हा इसे अपने दोस्तों के साथ share करना ना भूले ।

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